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Bilaspur Bank Fraud: 5 करोड़ का फर्जी लोन घोटाला, EOW ने बैंक मैनेजर समेत दो पर पेश किया चालान

बिलासपुर बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में 5.04 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले में EOW-ACB ने दो आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। 11 फर्जी फर्मों के जरिए लोन लेने का आरोप।

बिलासपुर, 31 अक्टूबर 2026। लोगों को बैंक से कारोबार के लिए लोन दिलाने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और संपत्ति के दस्तावेज हासिल किए गए। फिर इन्हीं दस्तावेजों के सहारे कागजों पर फर्जी फर्में खड़ी की गईं और बैंक से करोड़ों रुपये के लोन स्वीकृत करा लिए गए। बिलासपुर के बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा में सामने आए 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये के कथित लोन घोटाले में EOW-ACB ने जांच पूरी कर ली है। ब्यूरो ने 30 अक्टूबर 2026 को बिलासपुर स्थित विशेष न्यायालय में दो आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है।

इस मामले में उड़ान माइक्रो फाइनेंस का संचालन करने वाले विश्वजीत भौमिक और बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा को आरोपी बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि मामले में आरोपी तत्कालीन बैंक मैनेजर वर्तमान में गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।

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11 फर्मों के नाम पर निकाले गए करोड़ों रुपये के लोन

EOW-ACB की विवेचना के मुताबिक, बैंक की राजकिशोर नगर शाखा में 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन स्वीकृत किए गए। जांच में आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंकिंग नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए इन ऋणों को मंजूरी दी।

जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर फर्में बनाई गई थीं, उन्हें कई मामलों में इसकी जानकारी तक नहीं थी। ऋण लेने वाली फर्मों से असंबंधित लोगों की संपत्तियों को बंधक के रूप में स्वीकार किया गया। वहीं बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट में फर्जी पते और व्यवसाय का उल्लेख किया गया।

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लोन दिलाने के नाम पर लिए आधार-पैन और कोरे चेक

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले का मुख्य आरोपी विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा बिलासपुर में ‘उड़ान माइक्रो फाइनेंस’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। वह लोगों को बैंक से ऋण दिलाने का भरोसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, KYC दस्तावेज, संपत्ति के मूल दस्तावेज और हस्ताक्षर किए हुए कोरे चेक हासिल करता था।

इन्हीं दस्तावेजों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में बनाई गईं। कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर भी दर्शाया गया। जांच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। वहीं सात फर्मों के GST रिटर्न उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से दाखिल किए जाने के तथ्य सामने आए।

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NSIC के जरिए अपनी फर्म तक पहुंचाई रकम

इस पूरे मामले में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से भुगतान का रास्ता भी सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, बैंक से स्वीकृत ऋण राशि का इस्तेमाल संबंधित फर्मों के वास्तविक कारोबार में करने के बजाय दूसरे खातों में ट्रांसफर कर निकासी की गई।

जांच में विश्वजीत भौमिक को इस घोटाले का अंतिम लाभार्थी बताया गया है। आरोप है कि NSIC के माध्यम से रकम उसकी अपनी फर्म ‘ए.बी. फास्टनर्स’ तक पहुंचाई गई और कूटरचित बिलों के आधार पर भुगतान प्राप्त किया गया।

बैंक जांच में नहीं मिलीं फर्मों की व्यावसायिक इकाइयां

घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैंक के निरीक्षण के दौरान मौके पर संबंधित 11 फर्मों की वास्तविक व्यावसायिक इकाइयां नहीं मिलीं। वर्ष 2019 तक सभी 11 ऋण खाते NPA यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित हो चुके थे।

इस पूरे फर्जीवाड़े से बैंक को 5,04,15,000 रुपये की आर्थिक क्षति होने का मामला सामने आया है।

IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चालान

EOW-ACB ने विश्वजीत भौमिक (56 वर्ष), निवासी विवेकानंद नगर, मोपका, बिलासपुर और राहुल कुमार सिन्हा (45 वर्ष), तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ चालान पेश किया है।

दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-B के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 एवं 13(2) के तहत आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया है।

EOW-ACB की जांच पूरी होने के बाद अब मामला न्यायालय के समक्ष है। करोड़ों रुपये के इस कथित बैंकिंग घोटाले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।

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